पिछले रविवार को एक दिन के लिए न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी की यात्रा पर जाना हुआ। ब्लैक्सबर्ग जैसे छोटे शहर में रह कर न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी जैसे बड़े शहर एक अलग ही अनुभव होते हैं। पहले आठ घंटे की कार यात्रा भारी लग रही थी, लेकिन अपनी पत्नी और बहन का साथ और रास्ते भर बकर बकर में रास्ता पता ही नहीं चला। हमारा पड़ाव मुख्यतः न्यू जर्सी था जहाँ हम शाम चार बजे कार से पहुँचे। होटल से हम पास के ट्रांज़िट स्टेशन कार से गए। कार से जाने का लिए सड़क मानचित्र एसी जगह पर बहुत ही ज़रुरी होता है। आश्चर्यजनक रुप से होटल में मुफ्त मानचित्र नहीं थे, तब समझ आया कि यहाँ कुछ भी मुफ्त नहीं मिलता। होटल की दुकान से मानचित्र खरीदने की कोशिश की तो सेल्स गर्ल का मानचित्र दिखाने से पहले दाम बताने का, और बात करने का रवैया अच्छा नहीं लगा और फिर हमने एसे ही सबवे स्टेशन जाने की कोशिश की जो कि न्यूजर्सी में एक बड़ी गलती है। एक और दुकान में खैर मानचित्र खरीदा मगर अनुभव वही रहा। लगा कि न्यूजर्सी में लोग खुश हो के बात करना नहीं चाहते। खैर ये भ्रम भी बड़ी जल्दी टूट गया जब कुछ लोगों ने बड़े उत्साह के साथ पूछने पर रास्ता बताया। वैसे न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी पहुँचने से पहले मानचित्र ले लेना चाहिए, सस्ता भी पड़ता है। खैर नेवार्क शहर के पेन्न स्टेशन से हमने पाथ ट्रेन पकड़ी और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (न्यू यॉर्क) पहुँचे। उस जगह पाथ का स्टेशन था और 9/11 हादसे का स्मारक भी। हादसे के कई सारे चित्र वहाँ लगे थे। वहाँ से हमने सबवे पकड़ी और टाइम्स स्क्वायर गए। सब वे में बैठना अपनेआप में एक अनुभव है। एक के उपर एक कई तलों पर कई दिशाओं में चलती हुई ट्रेनें आश्चर्यचकित करती हैं। खैर, टाइम्स स्क्वायर की भव्यता चकाचौंध करने वाली थी। बड़े बड़े चमकदार डिजिटल होर्डिंग, बेहतरीन कैफे, थियेटर, खूबसूरत पोशाकों में सजे हुए खूबसूरत लोग। वहाँ के शोरूम और कैफे दैखने लायक थे। बग्घी में बैठने की इच्छा थी, मगर बारिश होने वाली थी। खैर एक बेहतरीन रेस्तरां (BOND 45) में बहुत महँगा और स्वादिष्ट खाना खाया, और बढ़िया कॉकटेल पी। रात को फिर सबवे से वापिस। यहाँ कार से चलना ठीक नहीं है, कई वन वे और भूल भलैया रास्तों में खोने से बेहतर है सस्ती सबवे में निश्चिंत घूमना। टाइम्स स्कवायर में मेरी बहन रूपल सबेरे नेवार्क में नेवार्क एवेन्यू गए, जो कि देसी इलाका है। एक बढ़िया मीठा पान खाया और दो तीन बार चाय पी। पकौड़ों और बटाटे बड़े से पेट भरा। घर के लिए सस्ते देसी सामान खरीदे। नेवार्क भी काफी बड़ा और व्यस्त शहर है और वहाँ घूमना भी अच्छा लगा। समय कम था अन्यथा लिबर्टी पार्क भी जाते। शाम साढ़े पाँच बजे निकल कर ब्लैक्सबर्ग पहुँचे रात साढ़े बारह बजे। चित्र संलग्न हैं। अनुराग |
Friday, January 12, 2007
न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी की एक दिन की यात्रा
Friday, January 05, 2007
ह्रि्तिक बनाम सुरेश
आज IBNLIVE पे ये दो खबरें एक साथ देखीं। एक ह्रि्तिक की और एक और सुरेश की। |
Tuesday, January 02, 2007
नए साल की शर्मनाक शुरुआत
बहुत दिन पहले मैंने हम हिन्दुस्तानियों के विनय और आत्मसम्मान की कमी के बारे में चिट्ठा लिखा था। हर कुछ दिन बाद कुछ ना कुछ एसा होता है जो कि मेरी बातों को सच करता है। अब ये मुम्बई की ताज़ातरीन घटना देखिए। नये साल के स्वागत की पार्टी और शराब के नशे में धुत्त लोगों ने एक महिला के लाथ अभद्र व्यवहार किया। कारण कभी क्षणिक उत्तेजना या किसी महिला के भड़काऊ वस्त्र नहीं होते, बल्कि कारण समाज, कानून और महिलाओं के प्रति घटिया और छोटा नज़रिया होना होता है। |
Saturday, December 23, 2006
Wednesday, December 20, 2006
धूम-२ः कूड़े का ढेर
रात के २ बज रहे हैं, घर पर अभी धूम-२ खत्म हुई है। मित्रों के साथ मिल कर ६ लोगों ने देखनी शुरू की, एक बीच में घर चला गया, और एक सो गया। बाकी जिन्होने खत्म की, उनके चेहरे के भाव एसे हैं जैसे किसी ने बूरी तरह बेवकूफ बनाया हो। |
Sunday, December 03, 2006
मेरा भारत महान
तरनतारन में तलवारबाजी, आगरा में पत्थरबाजी, सूरत में आगजनी ये सब हुआ एक दिन में। पूरे हफ्ते को जोड़ लें तो ट्रेनें फुकीं, महाराष्ट्र में सो अलग। सासाराम में एक दंपत्ति को जिंदा फूँक दिया। गैरजिम्मेदारी, लापरवाही, और निकम्मेपन का उदाहरण बना भागलपुर का पुल। |
Friday, December 01, 2006
भारतः एड्स पीड़ितों का नया गढ़
इस बार के मेरे रेडियो कार्यक्रम में यही चर्चा का विषय रहेगा। ज्यादा जानकारी के लिए देखें http://wuvtindian.blogspot.com/2006/12/dec-2-india-new-center-of-aids.html |

