Wednesday, November 29, 2006

एक कड़वा सच

आज ये झलकी देखी। ये फिल्म देखना अब आवश्यक हो गया है।

2 टिप्पणियाँ:

संजय बेंगाणी said...

क्या हमारी आँखे कब खुलेगी?

ratna said...

ज़रूरत है ऐसी पिल्मों की।