कल इस बारे में समाचार देखा कि २०३० तक हिमालय के हिमनद अपने आकार के १/५ ही रह जायेंगे। वैसे इस बारे में पहले भी को चेतावनियाँ आ चुकी हैं मगर यह ताज़ा रिपोर्ट कहती है कि इन हिमनदों के घटने का स्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है और अगर पृथ्वी यूं ही गर्म होती रही तो २०३० तक यह हिमनद बुरी तरह घट जायेंगे। यदि आपको लगता है कि आपको कुछ करना चाहिऐ तो पढिये टाइम का ताज़ा अंक और कुछ प्रेरणा लीजिये। लोगों को और जागरूक बनाइये, कृपण होइये, बिजली बचाइए, मगर कैसे भी करके इस पृथ्वी को बचाइए। |
Monday, April 02, 2007
सन् २०३० के बाद क्या गंगा बचेगी?
Tuesday, March 13, 2007
आओ जज करें
कई दिन से इस मुद्दे पर लिखने की सोच रहा था, एक दो बार इसी समस्या से पाला पड़ा तो सोचा अब मन की भड़ास निकाल ही दूँ। इंसान की शायद ये सबसे बड़ी कमियोॆ में से एक है, किसी व्यक्ति को, किसी वस्तु को तुरंत जज कर देना। इस हरकत के हममें से सभी शिकार हैं और जल्दी कोई भी मानेगा भी नहीं । |
एसी रही हमारी होली।
होली तो इस बार भी बड़ी जम कर खेली हर बार की तरह। सोचा आपको भी वर्चुअल होली खिला दें। हमारी श्रीमती जी इस बार हमारे साथ नहीं थी, तो हम यहाँ अकेले ही थे, और बिना दाढ़ी बनाए घूम सकते थे। बाकि के चित्र यहाँ हैं। लोग आते गए और होली खेल कर खा पी कर जाते गए, इसी खेलाखेली में जितने चित्र खींच सका, प्रस्तुत हैं। |
Saturday, March 10, 2007
आरक्षण के मुद्दे के जवाब पर कुछ जवाब
प्रदीप जी ने मेरे पिछले लेख पर कुछ टिपण्णी की। प्रदीप जी पहले तो इतनी लंबी टिपण्णी का धन्यवाद कि आपने अपना पूरा पक्ष सामने रखा है। मैं बड़ी पोस्ट नहीं लिख पाता, तो कोशिश करूंगा कि छोटे में अपनी बात कह सकूं। |
भारत पुनर्निमाण दल की आने वाले चुनावों कि तैयारी
संपादित: ये घोषणा छपी है भापुद के जालस्थल पर उप्र के चुनावों के संदर्भ में। |
Friday, March 09, 2007
आरक्षण - पुनः बढ़ती बहस
चूंकि अब खबर थोड़ी पुरानी होती जा रही है इसलिये इस मुद्दे पर बहस भी कम होती जा रही है, किन्तु आरक्षण का मुद्दा आज भी वहीँ पर है जहाँ करीब ६-७ महिने पहले था। सर्वोच्च न्यायालय में इस पर बहस अब पूरी हो चुकी है और न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखा हुआ है। |
Thursday, March 08, 2007
ब्लॉगर पर हिंदी का ट्रान्सलिट्रेशन टूल प्रयोग का prayas
हाँ भैया, तो हम ब्लॉगर का ट्रान्सलिट्रेशन टूल का प्रयोग करके ये ब्लॉग पोस्ट कर रहे हैं। मज़ा आ गया क़सम से इससे लिखने में। ये तो सच में बड़ी मजेदार स्टाइल है, और कंप्यूटर में किसी सेटिंग को बदलने कि भी कोई ज़रूरत नहीं है। यानी कि अब किसी भी कंप्यूटर पर बैठ कर इसे इस्तेमाल किया जा सकता है। |






