अमेरिकन सोसाइटी ऑफ़ एग्रिकल्चरल ऎंड बायोलोजिकल इंजीनीयर्स (ASABE) की वार्षिक संगोष्ठी इस बार मिनिआपोलिस में आयोजित की गयी थी। इस बार संगोष्ठी में हम भी अपने शोध का हिस्सा प्रस्तुत करने गए the। मिनिआपोलिस भी एक बड़ा शहर है। सैंट पॉल के साथ इन दोनो शहरों को ट्विन सिटीज़ भी कहा जाता है। ब्लैक्स्बर्ग से १८ घंटा गाड़ी चलाकर यानी करीब १००० मील, हम शनिवार कि रात मिनिआपोलिस से सटे ब्लूमिन्गटन में पहुंचे। उसके बाद चार दिन संगोष्ठी में कैसे बीत गए पता नहीं चला। इस बीच कई पुराने मित्रों से मिलना भी हुआ। इलाहबाद कृषी संस्थान से पढ़े हुए लोगों की एक येक मीटिंग भी आयोजित थी। खाने पीने के अलावा इस बात पर भी विचार विमर्श किया गया कि कि अपने संस्थान को किस प्रकार सहयोग दे सकते हैं। मिनिआपोलिस में कई भारतीय रेस्त्रां हैं, और ये खाने पीने के लिए बढ़िया जगह है। मुख्य शहर या डाउनटाउन काफी खूबसूरत है। डाउनटाउन की सारी इमारतें एक दूसरे से स्काईवे के द्वारा जुड़ी हुईं हैं। यानि आप बाहर निकले बिना किसी भी इमारत से किसी भी इमारत में जा सकते हैं। एसा इसलिए है, क्यूँकि सर्दियों में यहाँ न्यूनतम तापमान आसानी से शून्य से ३० डिग्री नीचे चला जाता है, और तब पैदल चल पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। मिनेसोटा राज्य जिसकी राजधानी मिनिआपोलिस है को झीलों का राज्य भी कहा जाता है, क्यूंकि यहाँ करीब १०००० झीलें हैं। मिनिअपोलिस के आस पास भी कई झीलें हैं, जिनको उनकी प्राकृतिक अवस्था में रखने का प्रयास किया जाता है। इसलिये भरे पूरे शहर से सटी हुई झीलें एकदम अलग ही दुनिया में ले जाती हैं। मिनिआपोलिस में अमरीका का सबसे बड़ा शॉपिंग मॉल भी है। इस मॉल के अन्दर एक एक्वेरियम है, एक थीम पार्क है, और सैकड़ों दुकानें तो खैर है ही। इस मॉल में भी हमने काफी समय बताया। संगोष्ठी के अन्तिम दिन हमारा अंत में प्रस्तुतीकरण था। अब चूंकि अगले दिन सबेरे ४ बजे निकलना था ब्लैक्स्बर्ग के लिए, इसलिये अन्तिम रात को जल्दी ही सुत गए। रास्ते में समय पास करने के लिए गाड़ी में कई खेल खेले, और ४ जुलाई को बजाने के लिए ख़ूब सारे पटाखे भी खरीदे। थोड़ी बहुत कहानी ये तसवीरें बता देंगी। अब अगली यात्रा बहुत जल्दी ही सैन फ़्रांसिस्को की है। पिछली बार जो जगहें ठीक से नहीं देख पाए थे, उनके बारे में बताएँगे। और हाँ इस बार कैमरा नहीं भूलूंगा। राग |
Monday, July 02, 2007
मिनिआपोलिस की हमारी यात्रा
Monday, May 21, 2007
सैन फ्रांसिस्को की हमारी ताज़ा यात्रा
अमरीका में रहते हुये अब ५ साल से ऊपर हो गए मगर पश्चिम में जाने का मौका हमें अब मिला। यूँ तो यात्रा करीब ४ दिन की थी, मगर दौड़ भागी में ही समय निकल गया और पर्यटन कम हो पाया। लेकिन हर नयी जगह का अपना अनुभव अलग ही होता है। सबसे बड़ी गलती ये कि हम जाते वक्त अपना कैमरा भूल गए, अब इस पर कितनी डांट खायी, ये बात फिर कभी। एक खास बात जो देखी सैन फ़्रांसिस्को में वो ये कि वहाँ के लोग पर्यावरण के प्रति बाक़ी जगहों से जागरूक लगे। कूड़ा रिसाईकल करने के लिए सब जगह सुविधाएं थीं। अधिकतर लोग सी ऍफ़ एल बल्ब का प्रयोग करते हैं। यहाँ तक कि विशालकाय सैन फ़्रांसिस्को पुल पर भी सी ऍफ़ एल बल्ब लगे थे। सैन फ़्रांसिस्को से कई छोटे शहर भी जुड़े हुए हैं, जैसे कि फ्रेमोंट, जहाँ काफी भारतीय रहते हैं। फ्रेमोंट इतना खूबसूरत है, जैसे जन्नत, बिना किसी अतिशयोक्ति। फिर से तस्वीरों कि कमी खल रही है। वहाँ एक भारतीय-पाकिस्तानी भोजनालय में ख़ूब खाना खाया। गजब का सस्ता खाना, और बड़ा स्वादिष्ट। शाम को खाने के समय ऐसे भीड़ देखने को मिलती कि लगता कोई अपने घर में खाना बनाना ही नहीं चाहता। लोग फ़ोन से आर्डर करके फिर खाना लेके भी जाते थे। सफाई के बारे में ज्यादा कुछ खास नहीं कहा जा सकता, लेकिन जहाँ इतना खाना बनता हो वहाँ ठीक ही होगा ;)। मगर जाने क्यों भारतीय दुकानों के शौचालय कहीँ साफ क्यों नहीं मिलते? कहना मुश्किल है मगर क्या ये हमारा राष्ट्रीय चरित्र दिखाता है? एक दो भारतीय कपड़ों की दुकान भी दिखी, पर जाने क्यों महिलाओं के भारतीय कपड़े अमरीका में बड़े ही बेकार मिलते हैं (हमारी धर्म पत्नी के अनुसार)। जैसा हमने पहले कहा है सैन फ़्रांसिस्को में मानचित्र आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन यहाँ अमेरिका के बाक़ी शहरों की तरह हर हाईवे एग्जिट की संख्या नहीं होती, जिससे कई बार धोखा हो सकता है कहीँ पहुंचने में, इसलिये गाड़ी चलते वक़्त ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। खैर अब हमारा सैन फ़्रांसिस्को कई बार आना जाना होता रहेगा तो तस्वीरों की कमी भी जल्दी पूरी कर देंगे। राग |
Friday, January 12, 2007
न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी की एक दिन की यात्रा
पिछले रविवार को एक दिन के लिए न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी की यात्रा पर जाना हुआ। ब्लैक्सबर्ग जैसे छोटे शहर में रह कर न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी जैसे बड़े शहर एक अलग ही अनुभव होते हैं। पहले आठ घंटे की कार यात्रा भारी लग रही थी, लेकिन अपनी पत्नी और बहन का साथ और रास्ते भर बकर बकर में रास्ता पता ही नहीं चला। हमारा पड़ाव मुख्यतः न्यू जर्सी था जहाँ हम शाम चार बजे कार से पहुँचे। होटल से हम पास के ट्रांज़िट स्टेशन कार से गए। कार से जाने का लिए सड़क मानचित्र एसी जगह पर बहुत ही ज़रुरी होता है। आश्चर्यजनक रुप से होटल में मुफ्त मानचित्र नहीं थे, तब समझ आया कि यहाँ कुछ भी मुफ्त नहीं मिलता। होटल की दुकान से मानचित्र खरीदने की कोशिश की तो सेल्स गर्ल का मानचित्र दिखाने से पहले दाम बताने का, और बात करने का रवैया अच्छा नहीं लगा और फिर हमने एसे ही सबवे स्टेशन जाने की कोशिश की जो कि न्यूजर्सी में एक बड़ी गलती है। एक और दुकान में खैर मानचित्र खरीदा मगर अनुभव वही रहा। लगा कि न्यूजर्सी में लोग खुश हो के बात करना नहीं चाहते। खैर ये भ्रम भी बड़ी जल्दी टूट गया जब कुछ लोगों ने बड़े उत्साह के साथ पूछने पर रास्ता बताया। वैसे न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी पहुँचने से पहले मानचित्र ले लेना चाहिए, सस्ता भी पड़ता है। खैर नेवार्क शहर के पेन्न स्टेशन से हमने पाथ ट्रेन पकड़ी और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (न्यू यॉर्क) पहुँचे। उस जगह पाथ का स्टेशन था और 9/11 हादसे का स्मारक भी। हादसे के कई सारे चित्र वहाँ लगे थे। वहाँ से हमने सबवे पकड़ी और टाइम्स स्क्वायर गए। सब वे में बैठना अपनेआप में एक अनुभव है। एक के उपर एक कई तलों पर कई दिशाओं में चलती हुई ट्रेनें आश्चर्यचकित करती हैं। खैर, टाइम्स स्क्वायर की भव्यता चकाचौंध करने वाली थी। बड़े बड़े चमकदार डिजिटल होर्डिंग, बेहतरीन कैफे, थियेटर, खूबसूरत पोशाकों में सजे हुए खूबसूरत लोग। वहाँ के शोरूम और कैफे दैखने लायक थे। बग्घी में बैठने की इच्छा थी, मगर बारिश होने वाली थी। खैर एक बेहतरीन रेस्तरां (BOND 45) में बहुत महँगा और स्वादिष्ट खाना खाया, और बढ़िया कॉकटेल पी। रात को फिर सबवे से वापिस। यहाँ कार से चलना ठीक नहीं है, कई वन वे और भूल भलैया रास्तों में खोने से बेहतर है सस्ती सबवे में निश्चिंत घूमना। टाइम्स स्कवायर में मेरी बहन रूपल सबेरे नेवार्क में नेवार्क एवेन्यू गए, जो कि देसी इलाका है। एक बढ़िया मीठा पान खाया और दो तीन बार चाय पी। पकौड़ों और बटाटे बड़े से पेट भरा। घर के लिए सस्ते देसी सामान खरीदे। नेवार्क भी काफी बड़ा और व्यस्त शहर है और वहाँ घूमना भी अच्छा लगा। समय कम था अन्यथा लिबर्टी पार्क भी जाते। शाम साढ़े पाँच बजे निकल कर ब्लैक्सबर्ग पहुँचे रात साढ़े बारह बजे। चित्र संलग्न हैं। अनुराग |


